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Twin Baby: जुड़वा बच्चे होने के लक्षण, कारण और जरुरी जानकारी

Twin Baby
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बहुत से लोग जुड़वा बच्चों (Twin Baby) की चाहत रखते हैं. हालांकि, ये विचार बुरा भी नहीं है. लेकिन सिंगल बच्चे की तुलना में जुड़वा बच्चों को गर्भ में रखना, गर्भावस्था में उनकी केयर और लालन-पालन काफी मुश्किल भरा होता है. कई बार गर्भवती का शरीर जुड़वां बच्चों के लिए तैयार नहीं होता, तो ऐसी प्रेग्नेंसी में काफी जटिलताएं देखने को मिल सकती है. अगर आप भी जुड़वां बच्चों की चाहत रखते हैं या गर्भवती के पेट में जुड़वा बच्चे पल रहे हैं तो आज का हमारा लेख इसी पर आधारित है, इसमें हम आपसे जुड़वां गर्भावस्था (Twin pregnancy) से जुड़ी जरूरी जानकारियां शेयर करेंगे.

Twin Baby

बच्चे जुड़वा (Twin Baby) पैदा क्यों होते हैं- Kyo peda hote hai judva bachhe

आनुवांशिक कारण: जुड़वा बच्चों का होना आनुवांशिक हो सकता है. अगर लड़की के परिवार में पहले जुड़वा बच्चे हो चुके हैं तो लड़की को भी जुड़वा बच्चे होने के चांस बढ़ जाते हैं.

ज्यादा उम्र में माँ बनना: कुछ स्टडीज में दावा किया गया है की कई बार ज्यादा उम्र में माँ बनने के कारण भी जुड़वा बच्चे होने की संभावना अधिक हो जाती है.

हाइट और वैट: महिला की हाइट और वैट भी जुड़वा बच्चों का कारण हो सकता है. अमेरिकन कॉलेज ऑफ अब्स्टेट्रिक्स एंड गायनोकोलोजिस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार माँ ही हाइट और वजन भी जुड़वा बच्चों का कारण हो सकती है.

नस्ल: नस्ल भी जुड़वा गर्भावस्था के लिए खास मायने रखती है. एक तरफ जहां एशियाई और हिस्पैनिक नस्ल में जुड़वा बच्चे होने की संभावना काफी कम होती है. जबकि अफ्रीकी नस्ल में जुड़वा बच्चे होने ही संभावना काफी अधिक होती है. अफ्रीकी नस्ल के बाद यूरोपीय लोगों में जुड़वा बच्चे होने की संभावना ज्यादा पाई जाती है.

जुड़वा बच्चों के प्रकार- Types of Twin Baby

जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं-

       ए) एक जैसे दिखने वाले- मैनोजाईगोटिक

       बी) एक जैसे न दिखने वाले- डायजाइगोटिक अर्थात आइडेंटिकल ट्विंस

twin newborns

मैनोजाईगोटिक: अधिकतर जुड़वा बच्चे (Twin Baby) एक जैसे ही दिखते है इन्हे मैनोजाईगोटिक (Manozygotic) कहा जाता है. ऐसी परिस्थिति तब होती है जब एक अंडा स्पर्म से निषेचित होता है और बाद में विभाजित होकर दो भाग में बंट जाता है. ऐसे भ्रूण जन्म के बाद एक सी शक्ल के होते है.

डायजाइगोटिक: डायजाइगोटिक (Diazygotic) बच्चों की स्थिति में जब दो अलग-अलग अंडे निषेचित होते हैं. ऐसे भ्रूण की जन्म के बाद दोनों की शक्लें अलग-अलग दिखती हैं. इस तरह के जुड़वां बच्चों में एक लड़का और एक लड़की होने की संभावना भी अधिक रहती है.

जुड़वा बच्चों के होने की संभावना- Chances of having twins

आंकड़ो के मुताबिक जुड़वां बच्चों की संभावनाएं केवल तीन प्रतिशत तक हो सकती है. हालांकि, आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि 1980 से लेकर 2009 तक जुड़वा बच्चों के जन्म में 76 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

जुड़वा बच्चे होने के लक्षण- Signs of having Twin Baby

गर्भवती महिला को जुड़वा बच्चे होने की स्थिति में कई तरह के संकेत और लक्षण नज़र आते हैं. बारीकी से उनका ध्यान करने पर महिला को अपने पेट में जुड़वा बच्चों के पल रहे होने का आभास हो जाता है.

जुड़वा बच्चे पैदा करने के नेचुरल तरीके- Natural ways to have twins

अगर आप भी जुड़वा बच्चों (Twin Baby) की चाहत रखते हैं तो आगे बताए गए तरीके आजमा सकते हैं-

जिंक युक्त चीजों को खाना: अपने भोजन में जिंक युक्त चीजें, जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां आदि शामिल करें. इनके नियमित प्रयोग से स्पर्म ज्यादा मात्रा में बनते हैं. इससे ज्यादा अंडे निषेचित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

याम: याम अथवा जंगली याम एक तरह की सब्जी ही है. यह अंडाशय को उत्तेजित करती है जिससे के दौरान एक से ज्यादा अंडे निकलने की संभावना बढ़ जाती है.

प्रोटीन: प्रोटीन युक्त चीजें जैसे टोफू व साबुत अनाज आदि नियमित रूप से खाने से भी जुड़वा बच्चों का सपना साकार किया जा सकता है. अधिक प्रोटीन युक्त चीजें अंडाशय को उत्तेजित करती है.

डेयरी उत्पाद: एक रिसर्च के अनुसार, डेयरी उत्पादों के कारण भी एक से ज्यादा बच्चों की गर्भावस्था हो सकती है. रिसर्च के में दावा किया गया है की जो महिला डेयरी उत्पाद का अधिक सेवन करती है, उसकी जुड़वां गर्भावस्था की संभावनाएं पांच गुना बढ़ जाती है.

गर्भावस्थाओं के बीच अंतर: जुड़वा गर्भावस्था की संभावना को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि आपकी पहली और अगली गर्भावस्था के बीच पर्याप्त अंतर हो. दो गर्भावस्थाओं के बीच कम समय रखने से जुड़वा गर्भावस्था की संभावना कम हो सकती है.

जुड़वा गर्भावस्था में महिलाओं के लिए आने वाली समस्याएं -Problems faced by women in twin pregnancy

twin babies in womb

वैसे तो गर्भावस्था के दौरान महिला को आवश्यक देखभाल की जरूरत होती ही है लेकिन जुड़वां गर्भावस्था में उन्हें देखभाल की विशेष जरूरत होती है. कई बार जुड़वां बच्चे के साथ गर्भवती महिलाओं को कई तरह की समस्याएं या जोखिम हो सकते है.

हाई बीपी: जुड़वां गर्भावस्था में गर्भवती महिला को उच्च रक्तचाप की समस्या होना आम बात है. अगर इस समस्या का समय पर निदान ना किया जाए तो गर्भस्थ शिशुओं पर इसका असर पड़ सकता है.

जन्म दोष:  जुड़वां गर्भावस्था के दौरान कई बच्चों को स्पाइना बिफिडा या अन्य तंत्रिका नली दोष की समस्या हो सकती है. अत: इस तरह की समस्या से बचने के लिए समय पर अल्ट्रासाउंड जरूर करवाना चाहिए.

समय से पहले प्रसव: जुड़वा गर्भावस्था में पांच में से तीन में समय से पहले डिलीवरी होने की आशंका रहती है. कई बार जुड़वां गर्भावस्था में बच्चे के जन्म के समय उसका ठीक से विकास नहीं हुआ होता.

मधुमेह: कई महिलाओं को जुड़वां गर्भावस्था के दौरान मधुमेह होने की भी समस्या भी हो सकती है.

गर्भपात: जुड़वां प्रेगनेंसी के दौरान कई बार लापरवाही या अन्य किसी तरह की समस्याओं के चलते गर्भपात का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है.

एनीमिया: गर्भावस्था में कई महिलाओं को खून की कमी अर्थात एनीमिया की दिक्कत हो सकती है. खासतौर पर, जुड़वां गर्भावस्था के दौरान एनीमिया होने की दिक्कत होना आम बात है.

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