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Dharan ka ilaj: नाभि खिसकने के लक्षण, कारण और इसके घरेलू उपाय

नाभि खिसकने के लक्षण
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धरण पड़ना या नाभि खिसकना एक ऐसी समस्या है जो मामूली सी नज़र आती है लेकिन जब हमें इस समस्या दो चार होना पड़े तो नानी याद आ जाती है. यह एक ऐसी समस्या है जो किसी भी उम्र में हो सकती है. खास बात यह है की डॉक्टर की रिपोर्ट भी नाभि खिसकने के लक्षण आसानी से नहीं दिखा पाती है. वैसे तो यह एक सामान्य समस्या है लेकिन जानकारी न हो तो यह लाखों खर्च करने के बाद भी ठीक नहीं हो पाती है.

नाभि खिसकने के लक्षण

नाभि का खिसकना (Dharan ka ilaj) क्या होता है अथवा धरन क्या होती है?

नाभि हमारे शरीर का सबसे अहम और केंद्र बिन्दु है, जिस पर शरीर की सभी मांसपेशियों या नाड़ियाँ निर्भर करती है. नाभि उन सभी का आधार मानी जाती है. यदि इसमें किसी तरह की समस्या आती है तो पेट की नाड़ियाँ कुछ सख्त हो जाती है. समस्या ज्यादा हो तो पेचिस, पेट में दर्द, कब्ज़ होना, भूख में कमी आना, दस्त, सर्दी-ज़ुकाम, कफ, मंदाग्नि, अपच या अफरा जैसी समस्याओं से वास्ता पड़ना लाजिमी है. साधारण भाषा में इसे धरण पड़ना, नाभी खिसकना, नाभी टलना या नाभी डिगना कहते है.

नाभि खिसकने के कारण (Reason of Dharan)

कई बार सामान्य क्रियाकलापों के दौरान ही धरण पड़ने की समस्या हो जाती है. लेकिन भारी सामान उठाने से, गिरने-पड़ने से, हाथों और पावों में यदि जोर का झटका लग जाए उस स्थिति में नाभी में सामान्य अवस्था में रहने वाली हवा अपने निर्धारित स्थान से अलग हो जाती है. कई बार चलते समय अचानक ऊँची या नीची जगहों पर पैर टिकने की वजह से भी नाभि खिसक सकती है.

महिलाओं और पुरुषों में नाभी डिगना

आपको हैरानी होगी कि पुरुषों में बाएं ओर (बाईं तरफ) नाभि खिसकती है जबकि स्त्रियों में नाभि दाएं ओर (दाईं तरफ) खिसकती हैं. नाभि या धरण (Dharan) जिस ओर खिसकती है उस ओर पेट का हिस्सा हल्का दबाने से काफी सख्त महसूस होता हैं. इसके अलावा पेट में मरोड़ उठने और दर्द होने की दिक्कत भी हो जाती है.

नाभि खिसकने के लक्षण क्या है (What are the symptoms of an umbilical cord)

वैसे तो नाभी खिसकने की दिक्कत होने के बाद ऊपर लिखी समस्याओं जैसे पेचिस, पेट में दर्द, कब्ज़ होना, भूख में कमी आना, दस्त, सर्दी-ज़ुकाम, कफ, मंदाग्नि, अपच या अफ़ारा जैसी समस्या हो जाती है. एक अन्य पहचान के लिए जमीन पर सीधे पीठ के बल लेट जाएँ और अपनी नाभी पर अंगूठा रखें. हल्के दबाव के साथ धड़कन को महसूस करें, अगर धड़कन नाभी के केंद्र से दूर यानि नाभी से दो तीन इंच दूर महसूस हो रही है तो निश्चित ही आपको धरण डिगने की समस्या यानि आपकी नाभि अपने स्थान से खिसक चुकी है.

नाभि खिसकने अथवा धरण पड़ने की पहचान (Identification of navel slipping or mold)

अपने दोनों पैरों को सटाकर सीधे और सावधान की मुद्रा खड़े हो जाएँ. इसके बाद दोनों हाथों को सामने सीधा करके आपस में मिलाएं यदि दोनों हाथों की अंगुलियां बराबर हैं तो नाड़ा सही है लेकिन अगर दोनों हाथों की अंगुलियाँ छोटी-बड़ी दिख रही हैं तो नाड़ा उखड़ा हुआ है. यही नाभि टलने की पहचान अथवा नाभि खिसकने के लक्षण है.

Navel sliding home remedies

नाभि खिसकने के उपाय हिन्दी में (Measures to move the navel in Hindi)

नाभि खिसक जाने पर क्या करना चाहिए?

नाभि टलने या धरण पड़ने की दिक्कत हो जाने पर सबसे पहले भारी काम जैसे वजन उठाना, उछल-कूद, खेल, दौड़ लगाना और कठिन परिश्रम वाले काम करने से बचना चाहिए. इसके अलावा पेट को मसलने और दबाने से भी परहेज करना चाहिए.

धरण का इलाज (Treatment of mold)

अब यदि मरीज की परेशानी का कारण जान लेने के बाद, उसका निवारण भी जानना जरूरी है. इसके लिए हम यहां आपको कुछ उपाय बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से बिना किसी दवा के नाभि अपने स्थान पर वापस आ जाएगी.

नाभि को सही करने के देशी उपचार (Native treatment of navel correcting)

रोगी धरण के उपचार के लिए सुबह खाली पेट पीठ के बल लेट जाएं. अपने दोनों हाथ-पैरों को ढीला छोड़ें यानि शवासन की मुद्रा में लेट जाएँ. किसी धागे से नाभि से दोनों छातियों की दूरी माप लें यदि दूरी में असमानता है तो नाभि खिसकी हुई है. अब धीरे धीरे अपने एक पैर को सीधा रखते हुए ऊपर की तरफ उठाएँ.  कुछ देर उसी अवस्था में रहें और फिर धीरे धीरे नीचे ले आयें. सामान्य अवस्था में आने के बाद अब दूसरे पैर से भी यही क्रिया दोहराएँ. तीसरी बार अपने दोनों पैरों को एक साथ ऊपर की ओर उठाएँ. ऐसा कम से कम तीन से चार बार करें.

इसके बाद सीधे खड़े हो जाएँ और दोनों हथेलियों को मिलाने पर यदि अंगुलियां छोटी-बड़ी नजर आ रही है तो जिधर की उंगली छोटी हो उधर के हाथ की मुट्ठी बांध लें और दूसरे हाथ से उस हाथ की कोहनी को पकड़कर कंधे की तरफ़ झटकें. ऐसा आठ या दस बार करने से नाभि अपनी जगह आ जायेगी.

dharan ka ilaj in hindi

एक अन्य उपाय के अनुसार पीठ के बल लेटे हुए नाभि के चारों तरफ़ सूखा आंवले के चूर्ण में अदरक का रस मिलाकर नाभि पर बांध लें लगभग दो घंटे लेटे रहें. दिन में दो बार ऐसा करने से नाड़ा अपनी वास्तविक स्थिति में आ जायेगा.

नाभि खिसकने के आसन (Navel sliding posture)

पीठ के बल लेटकर पादांगुष्ठनासास्पर्शासन करें. इसके लिए जमीन पर सीधे पीठ के बल लेट जाएँ और बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हाथों से पैर को पकड़ लें व पैर को खींचकर मुंह तक ले आयें. सिर उठायें व पैर का अंगूठा नाक से लगाने का प्रयास करें. इसी अवस्था में कुछ देर रुकें फिर धीरे धीरे सामान्य अवस्था में आ जायें. अब दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया रिपिट करें. फिर दोनों पैरों से एक साथ ऐसा करें. तीन बार करने से नाभि अपनी सही जगह आ जाएगी. उत्तानपादासन, मत्स्यासन, धनुरासन व चक्रासन से भी नाभि अपनी जगह आ जाती है.

बार बार नाभि टलना (Repeated Navel sliding)

अगर आपको नाभि टलने की समस्या बार बार हो रही है तो दो चम्मच सौंफ का पाउडर गुड़ में मिलाकर एक सप्ताह तक सेवन करें तो उपचार अवश्य हो जाता हैं और फिर नाभि खिसकने की समस्या होती भी नहीं है. इसके अलावा अपने पैर के अंगूठे में काला धागा बांध लेने से भी बार बार धरण पड़ने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है.

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धरण पड़ने पर भोजन कैसा करें

वैसे तो इसके लिए कोई खास खाने पीने संबंधी परहेज नहीं होते लेकिन फिर भी जिन्हें धरण पड़ने की दिक्कत बार बार होती है उन्हें सादा खाना लेना चाहिए. धरण पड़ जाने पर पर नरम और सुपाच्य खाना ही लेना चाहिए। आमतौर पर रोगी को मूंग की खिचड़ी खाना बेहतर रहता है. इसके अलावा दिन में एक-दो बार पांच मिलीग्राम तक अदरक का रस देने से लाभ मिलता हैं. भोजन ऐसा होना चाहिए जो शरीर आसानी से पचा सके.

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